Monday, 26 October 2020

रावण ने रचे हिन्दू धर्म के ये महान ग्रंथ । Books written by Ravan

रावण के द्वारा रचे गए ये शास्त्र पढ़ेंगे तो आप भी महापंडित बन जाएंगे

शिव तांडव स्तोत्र : रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना करने के अलावा अन्य कई तंत्र ग्रंथों की रचना की। रावण ने कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और जब पूरे पर्वत को ही लंका ले जाने लगा, तो भगवान शिव ने अपने अंगूठे से तनिक-सा जो दबाया तो कैलाश पर्वत फिर जहां था वहीं अवस्थित हो गया। इससे रावण का हाथ दब गया और वह क्षमा करते हुए कहने लगा- 'शंकर-शंकर'- अर्थात क्षमा करिए, क्षमा करिए और स्तुति करने लग गया। यह क्षमा याचना और स्तुति ही कालांतर में 'शिव तांडव स्तोत्र' कहलाया।

अरुण संहिता : संस्कृत के इस मूल ग्रंथ का अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है। मान्यता है कि इस का ज्ञान सूर्य के सार्थी अरुण ने लंकाधिपति रावण को दिया था। यह ग्रंथ जन्म कुण्डली, हस्त रेखा तथा सामुद्रिक शास्त्र का मिश्रण है।

रावण संहिता : रावण संहित जहां रावण के संपूर्ण जीवन के बारे में बताती है वहीं इसमें ज्योतिष की बेहतर जानकारियों का भंडार है।

चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र में रावण के ये ग्रंथ चर्चित हैं- 1. दस शतकात्मक अर्कप्रकाश, 2. दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र, 3. कुमारतंत्र और 4. नाड़ी परीक्षा।

रावण के ये चारों ग्रंथ अद्भुत जानकारी से भरे हैं। रावण ने अंगूठे के मूल में चलने वाली धमनी को जीवन नाड़ी बताया है, जो सर्वांग-स्थिति व सुख-दु:ख को बताती है। रावण के अनुसार औरतों में वाम हाथ एवं पांव तथा पुरुषों में दक्षिण हाथ एवं पांव की नाड़ियों का परीक्षण करना चाहिए।

अन्य ग्रंथ : ऐसा कहते हैं कि रावण ने ही अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी।

इसी प्रकार शिशु-स्वास्थ्य योजना का विचारक 'अर्कप्रकाश' को रावण ने मंदोदरी के प्रश्नों के उत्तर के रूप में लिखा है। इसमें गर्भस्थ शिशु को कष्ट, रोग, काल, राक्षस आदि व्याधियों से मुक्त रखने के उपाय बताए गए हैं। 'कुमारतंत्र' में मातृकाओं को पूजा आदि देकर घर-परिवार को स्वस्थ रखने का वर्णन है। इसमें चेचक, छोटी माता, बड़ी माता जैसी मातृ व्याधियों के लक्षण व बचाव के उपाय बताए गए हैं।

Thursday, 8 October 2020

रावण ने मरते वक़्त लक्ष्मण को कौन सी तीन महत्वपूर्ण बातें बतायीं ??



रावण ने मरते वक़्त लक्ष्मण को
कौन सी तीन महत्वपूर्ण बातें बतायीं
राम प्रत्येक भारतीय के आराध्य देव हैं और वे भारत के कण-कण
में रमें हैं। वे आदर्श पुरुष हैं
, मर्यादा
पुरुषोत्तम हैं। उनकी तुलना में रावण को राक्षस
, कुरूप, अत्याचारी, आतताई आदि विकृति
के विभिन्न प्रतीक रूपों में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन क्या यह संभव है कि
समृद्ध
, वैभवपूर्ण विशाल राष्ट्र का अधिनायक केवल दुर्गुणों से भरा
हो
? वह भी ऐसा सम्राट जिसे राज्य सत्ता उत्तराधिकार में न मिली
हो
, बल्कि अपने कौशल, दुस्साहस और
अनवरत संघर्ष से जिसने अपने समकालीन राजाओं को अपदस्थ कर सत्ता हासिल कर उसकी
सीमाओं का लगातार विस्तार किया हो
, ऐसा नरेश सिर्फ
दुराचारी और अविवेकशील नहीं हो सकता
? ऐसे सम्राट की
राजनैतिक व कूटनीतिक चतुराई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आइये जानते हैं रावण ने
मरते वक़्त लक्ष्मण को क्या तीन बातें बतायीं।

जिस समय रावण मरणासन की अवस्था में धरती पर पड़ा हुआ था, राम ने लक्ष्मण
से कहा
, राजनीति शास्त्र
का महान विद्वान इस दुनिया से विदा ले रहा है
, तुम जाकर उस प्रकांड विद्वान से कुछ जीवन की शिक्षा ले लो।
भईया की आज्ञा अनुसार लक्ष्मण रावण के सिर के पास जाकर खड़े हो गए। रावण ने
लक्ष्मण से कुछ नहीं कहा
,
तब लक्ष्मण वापस
भईया राम के पास चले आए। राम ने इसे देखकर कहा
, लक्ष्मण शिक्षा हमेशा गुरु के चरणों के पास ही बैठकर ली
जाती है
, यह सुनकर लक्ष्मण
रावण के पैरों के पास जाकर बैठ गए तब महाज्ञानी तथा प्रकांड विद्वान रावण ने
लक्ष्मण को जीवन की तीन अमूल्य बातें बताई ।
१. पहला उपदेश: रावण ने लक्ष्मण को सबसे पहली बात यह बताई
कि शुभ कार्य को जितना जल्दी हो सके कर लेना चाहिए। उसके लिए कभी लंबा इंतजार नहीं
करना चाहिए
, वरना जीवन कब
समाप्त हो जाए किसी को पता नहीं। (क्योकि रावण ने कई शुभ कार्यो को किसी कारण वश
टाल रखा था
, जिसे वह कभी पूरा
नहीं कर पाया।) तथा अशुभ कार्य को जितना टाला जा सके उसे टाल देना चाहिए।

२. दूसरा उपदेश: रावण ने लक्ष्मण को दुसरा सबसे महत्वपूर्ण
बात बताया कि शत्रु तथा रोग को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए
, छोटे से छोटा रोग
भी प्राण घातक हो सकता है
,
तथा छोटे से छोटा
शत्रु भी सर्वनाश कर सकता है। रावण ने राम
, लक्ष्मण और उनकी वानर सेना को तुक्छ समझा था, और वही रावण के
मृत्यु का कारण बने।

३. तीसरा उपदेश: रावण ने लक्ष्मण को तीसरी ज्ञान की बात यह
बताई कि
, अपने जीवन से
जुड़े राज को यथासंभव गुप्त ही रखना चाहिए। उसे किसी भी व्यक्ति से नहीं बतानी
चाहिए
, चाहे वह अपका
सबसे प्रिय क्यों ना हो। यदि वह रहस्य प्रगट हो गया
, तो उसका जीवन पर बुरा प्रभाव हो सकता है। रावण
के नाभि में अमृत कुंड का रहस्य विभीषण द्वारा प्रगट होने पर ही रावण का वध हुआ।

कलयुग में नारायणी सेना की वापसी संभव है ? The Untold Story of Krishna’s ...

क्या महाभारत युद्ध में नारायणी सेना का अंत हो गया ... ? या फिर आज भी वो कहीं अस्तित्व में है ... ? नारायणी सेना — वो ...