ये काल चक्र है इस काल चक्र मे आज हम आपको जन्माष्टमी व्रत की तिथि और पूजन
विधि बताएँगे
श्री कृष्ण,
भगवान विष्णु के
अकेले ऐसे अवतार हैं जिनके जीवन के हर पड़ाव मे अलग अलग रंग दिखाई देते हैं। कभी
उन्होने बाल रूप मे भक्तों का दिल मोह लिया तो कभी महाभारत में गीता के उपदेश से
कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ भगवान श्री कृष्ण ने पढ़ाया, आज भी
उसका अध्ययन करने पर हर बार नये अर्थ निकल कर सामने आते हैं । भगवान श्री कृष्ण के
जन्म का उत्सव ही हम सब जन्माष्टमी के रूप मे मनाते हैं।
अकेले ऐसे अवतार हैं जिनके जीवन के हर पड़ाव मे अलग अलग रंग दिखाई देते हैं। कभी
उन्होने बाल रूप मे भक्तों का दिल मोह लिया तो कभी महाभारत में गीता के उपदेश से
कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ भगवान श्री कृष्ण ने पढ़ाया, आज भी
उसका अध्ययन करने पर हर बार नये अर्थ निकल कर सामने आते हैं । भगवान श्री कृष्ण के
जन्म का उत्सव ही हम सब जन्माष्टमी के रूप मे मनाते हैं।
श्री कृष्ण का जन्म का भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष
की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। इस वर्ष यह त्योहार
स्मार्त संप्रदाय के अनुसार 14 अगस्त को मनाई जाएगी तो वहीं वैष्णव संप्रदाय के
अनुसार 15 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।
की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। इस वर्ष यह त्योहार
स्मार्त संप्रदाय के अनुसार 14 अगस्त को मनाई जाएगी तो वहीं वैष्णव संप्रदाय के
अनुसार 15 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।
आइए जानते हैं इस बहुत ही पवित्र व्रत की सही पूजन विधि
क्या है ?
क्या है ?
कृष्ण जन्माष्टमी को पूरे दिन भक्तों को उपवास रखना
होता है। ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ खास बातों का ध्यान रखें। जैसे आपकी सेहत के
लिए जरूरी है कि एक दिन पहले खूब लिक्विड लें और जन्माष्टमी से पिछली रात को
हल्का भोजन करें। प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर हमे सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, भूमि, आकाश, खचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठें।
इसके बाद आपको हाथ में जल लेकर संकल्प करना
है । अब मध्याह्न के समय देवकीजी के लिए प्रसूति-गृह का निर्माण करें। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की
मूर्ति या चित्र स्थापित करें। ध्यान रखें इस दिन भगवान कृष्ण के बल स्वरूप की
मूर्ति या चित्र की स्थापना करना शुभ माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिर
रात बारह बजे तक खुले होते हैं। बारह बजे के बाद कृष्ण जन्म होता है और इसी के साथ
सब भक्त चरणामृत लेकर अपना व्रत खोलना होता है ।
होता है। ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ खास बातों का ध्यान रखें। जैसे आपकी सेहत के
लिए जरूरी है कि एक दिन पहले खूब लिक्विड लें और जन्माष्टमी से पिछली रात को
हल्का भोजन करें। प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर हमे सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, भूमि, आकाश, खचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठें।
इसके बाद आपको हाथ में जल लेकर संकल्प करना
है । अब मध्याह्न के समय देवकीजी के लिए प्रसूति-गृह का निर्माण करें। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की
मूर्ति या चित्र स्थापित करें। ध्यान रखें इस दिन भगवान कृष्ण के बल स्वरूप की
मूर्ति या चित्र की स्थापना करना शुभ माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिर
रात बारह बजे तक खुले होते हैं। बारह बजे के बाद कृष्ण जन्म होता है और इसी के साथ
सब भक्त चरणामृत लेकर अपना व्रत खोलना होता है ।
जन्माष्टमी व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी
व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त
व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी
व्रत तिथि - 14 अगस्त 2017
व्रत तिथि - 14 अगस्त 2017
निशिथ
पूजा– 00:03
से 00:47 (15 अगस्त 2017)
पूजा– 00:03
से 00:47 (15 अगस्त 2017)
पारण– 17:39
(15 अगस्त 2017) के बाद
(15 अगस्त 2017) के बाद
श्रीकृष्ण
जन्माष्टमी के इस शुभावसर पर काल चक्र की तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
जन्माष्टमी के इस शुभावसर पर काल चक्र की तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
आज का श्लोक ज्ञान :
यदा
यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य
तदाऽऽत्मानं सृजाम्यहम्।
तदाऽऽत्मानं सृजाम्यहम्।
परित्राणाय
साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय
सम्भवामि युगे युगे ॥
सम्भवामि युगे युगे ॥
जब जब
धर्मकी हानि और अधर्मकी वृद्धि होती है तबतब ही मैं अपने आपको साकार रूप से प्रकट
करता हूँ।
धर्मकी हानि और अधर्मकी वृद्धि होती है तबतब ही मैं अपने आपको साकार रूप से प्रकट
करता हूँ।
साधु
पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से
स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ।
पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से
स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ।
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Watch Full Video Here - Krishna Janmashtami14 Aug 2017
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