महाभारत मे सम्पूर्ण धर्म, दर्शन, युद्ध, ज्ञान विज्ञान, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र,
वास्तुशास्त्र, कामशास्त्र,
शिल्पशास्त्र, और खगोलविद्या की बातें शामिल हैं । ऐसा कुछ
भी नहीं है जो महाभारत मे नहीं है और इसीलिए महाभारत को पंचवा वेद भी कहा जाता है
। इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों मे से एक माना जाता है और आज भी ये ग्रंथ प्रत्येक
भारतीय के लिए अनुकरनिए स्रोत है । महाभारत प्राचीन भारत के
इतिहास की एक गाथा है और इसी मे हिन्दू धर्म का पवित्रतम ग्रंथ भगवद्गीता सनहित है
।
वास्तुशास्त्र, कामशास्त्र,
शिल्पशास्त्र, और खगोलविद्या की बातें शामिल हैं । ऐसा कुछ
भी नहीं है जो महाभारत मे नहीं है और इसीलिए महाभारत को पंचवा वेद भी कहा जाता है
। इसे साहित्य की सबसे अनुपम कृतियों मे से एक माना जाता है और आज भी ये ग्रंथ प्रत्येक
भारतीय के लिए अनुकरनिए स्रोत है । महाभारत प्राचीन भारत के
इतिहास की एक गाथा है और इसी मे हिन्दू धर्म का पवित्रतम ग्रंथ भगवद्गीता सनहित है
।
हालांकि यह एक आश्चर्य और रहस्य आज भी बरकरार है की
आखिर महाभारत मे 18 अंक का क्या रहश्य है और यह एक सोध का विषय भी हो सकता है ।
आखिर महाभारत मे 18 अंक का क्या रहश्य है और यह एक सोध का विषय भी हो सकता है ।
पहला संयोग : महाभारत की पुस्तक मे कुल 18
पर्व(अध्याय) हैं ।
पर्व(अध्याय) हैं ।
आदि पर्व, सभा पर्व, अरयण्कपर्व, विराट पर्व,
उद्योग पर्व, भीष्म पर्व, द्रोण पर्व, कर्ण पर्व , शल्य पर्व , सौप्तिकपर्व,
स्त्रीपर्व शांतिपर्व , अनुशनपर्व, अश्वमेधिकापर्व, आश्रम्वासिकापर्व, मौसुलपर्व, महाप्रस्थानिकपर्व, स्वर्गारोहणपर्व ।
उद्योग पर्व, भीष्म पर्व, द्रोण पर्व, कर्ण पर्व , शल्य पर्व , सौप्तिकपर्व,
स्त्रीपर्व शांतिपर्व , अनुशनपर्व, अश्वमेधिकापर्व, आश्रम्वासिकापर्व, मौसुलपर्व, महाप्रस्थानिकपर्व, स्वर्गारोहणपर्व ।
दूसरा संयोग : कृष्ण ने कुल 18 दिन तक अर्जुन को
ज्ञान दिया ।
ज्ञान दिया ।
तीसरा संयोग : महाभारत का युद्ध कुल 18 दिनो तक चला
था ।
था ।
चौथा संयोग : श्रीमद्भगवत गीता मे भी कुल 18 अध्याय
हैं ।
हैं ।
पंचवा संयोग : कौरवों और पांडवों की कुल सेना की
संख्या भी 18 अक्षोनि ही थी । जिसमे कौरवों के पास 11 अक्षोहिणी और पांडवों के पास
7 अक्षोहिणी सेना थी ।
संख्या भी 18 अक्षोनि ही थी । जिसमे कौरवों के पास 11 अक्षोहिणी और पांडवों के पास
7 अक्षोहिणी सेना थी ।
छठा संयोग : इस
युद्ध के प्रमुख सूत्रधार भी 18 हैं। धृतराष्ट्र, दुर्योधन,
दुह्शासन, कर्ण, शकुनी,
भीष्मपितामह, द्रोणचार्य, कृपाचार्य, अश्वस्थामा, कृतवर्मा,
श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर, भीम,
अर्जुन, नकुल, सहदेव,
द्रौपदी एवं विदुर ।
युद्ध के प्रमुख सूत्रधार भी 18 हैं। धृतराष्ट्र, दुर्योधन,
दुह्शासन, कर्ण, शकुनी,
भीष्मपितामह, द्रोणचार्य, कृपाचार्य, अश्वस्थामा, कृतवर्मा,
श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर, भीम,
अर्जुन, नकुल, सहदेव,
द्रौपदी एवं विदुर ।
संतवा संयोग : महाभारत के युद्ध के पश्चात् कौरवों
के तरफ से तीन और पांडवों के तरफ से 15 यानि कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे।
के तरफ से तीन और पांडवों के तरफ से 15 यानि कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे।
आज का श्लोक ज्ञान :
"कर्मणये वाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन ।
मां
कर्मफलहेतुर्भू: मांते संङगोस्त्वकर्मणि" ।।
कर्मफलहेतुर्भू: मांते संङगोस्त्वकर्मणि" ।।
अर्थात : कर्म करना तो तुम्हारा अधिकार है, लेकिन उसके फल पर कभी नहीं|
कर्म को फल की इच्छा से कभी मत करो, तथा तेरा कर्म ना करने में भी कोई आसक्ति न हो|
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