अर्जुन के महाविनाशकारी
अस्त्र शस्त्र
अस्त्र शस्त्र
वेदों में 18 युद्ध कलाओं के विषयों पर मौलिक ज्ञान अर्जित है। प्राचीन
वैदिक काल में सभी तरह के अस्त्र-शस्त्र थे। इसका उल्लेख वेदों में मिलता है।
हालांकि ये किस तकनीक से संचालित होते थे, यह शोध का विषय हो सकता है, लेकिन यह तो तय था कि वे सभी दिव्यास्त्र
मंत्रों की शक्ति से ही संचालित होते थे। जब हम बात
महाभारत की करेंगे तो हम ये जान
लेते हैं कि महाभारत में सबसे वीर और भगवान के निकटतम योद्धा की बात आती है तो
सबसे पहले नाम अर्जुन की ही आता है। अर्जुन की शक्ति का कई बार वर्णन हमें महाभारत
में मिलता है जिन्होंने एक बार विराट के युद्ध में लगभग सभी कौरवों (भीष्ण,कर्ण और
द्रोणाचार्य भी) को अकेले ही हरा दिया था। महाभारत के अंतिम निर्णायक युद्ध में भी
अर्जुन ने उन योद्धाओं का वध किया जो कि उस
समय समस्त संसार में शक्तिशाली थे। आइये जानते हैं अर्जुन के पास ऐसे कौन से अस्त्र थे जिससे
उन्होने इन महान हस्तियों को परास्त किया था।
वैदिक काल में सभी तरह के अस्त्र-शस्त्र थे। इसका उल्लेख वेदों में मिलता है।
हालांकि ये किस तकनीक से संचालित होते थे, यह शोध का विषय हो सकता है, लेकिन यह तो तय था कि वे सभी दिव्यास्त्र
मंत्रों की शक्ति से ही संचालित होते थे। जब हम बात
महाभारत की करेंगे तो हम ये जान
लेते हैं कि महाभारत में सबसे वीर और भगवान के निकटतम योद्धा की बात आती है तो
सबसे पहले नाम अर्जुन की ही आता है। अर्जुन की शक्ति का कई बार वर्णन हमें महाभारत
में मिलता है जिन्होंने एक बार विराट के युद्ध में लगभग सभी कौरवों (भीष्ण,कर्ण और
द्रोणाचार्य भी) को अकेले ही हरा दिया था। महाभारत के अंतिम निर्णायक युद्ध में भी
अर्जुन ने उन योद्धाओं का वध किया जो कि उस
समय समस्त संसार में शक्तिशाली थे। आइये जानते हैं अर्जुन के पास ऐसे कौन से अस्त्र थे जिससे
उन्होने इन महान हस्तियों को परास्त किया था।
1. इंद्र अस्त्र इन्द्र देवता
द्वारा संचालित किया जाता है। इसका एक बार किया गया प्रयोग आसमान से बाणों की
वर्षा कर देता है।
द्वारा संचालित किया जाता है। इसका एक बार किया गया प्रयोग आसमान से बाणों की
वर्षा कर देता है।
2. आग्नेय अस्त्र अग्नि देव द्वारा संचालित इस अस्त्र का प्रयोग एक ही बार
में हर जगह आग को फैलाने के लिए किया जाता है। इस अस्त्र का सामना सिर्फ वरुण यानि
जल अस्त्र ही कर सकता है।
में हर जगह आग को फैलाने के लिए किया जाता है। इस अस्त्र का सामना सिर्फ वरुण यानि
जल अस्त्र ही कर सकता है।
3. वरुण अस्त्र
यह अस्त्र वरुण यानि जल देवता द्वारा संचालित
किया जाता है। इसका प्रयोग करने से एक ही बार में बड़ी मात्रा में पानी को प्रवाहित
किया जा सकता है। मुख्यत: इस अस्त्र का प्रयोग आग्नेय अस्त्र के प्रभाव को रोकने
के लिए किया जाता है।
किया जाता है। इसका प्रयोग करने से एक ही बार में बड़ी मात्रा में पानी को प्रवाहित
किया जा सकता है। मुख्यत: इस अस्त्र का प्रयोग आग्नेय अस्त्र के प्रभाव को रोकने
के लिए किया जाता है।
4. वायु अस्त्र
पवन देव द्वारा संचालित इस अस्त्र का प्रयोग
करने से वायु तेज हवा में बहने लगती थी। वायु की गति इतनी तेज होती थी कि दुश्मन
तक कांप उठते थे।
करने से वायु तेज हवा में बहने लगती थी। वायु की गति इतनी तेज होती थी कि दुश्मन
तक कांप उठते थे।
5. सम्मोहन अस्त्र
इसका प्रयोग महायोद्धाओं तक को यह भूलने के लिए
मजबूर कर सकता था कि वह किससे और किस उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं। जो इस अस्त्र को
चलाता उसी के मोहपाश में बंधकर सब रह जाते थे।
मजबूर कर सकता था कि वह किससे और किस उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं। जो इस अस्त्र को
चलाता उसी के मोहपाश में बंधकर सब रह जाते थे।
6. अर्जुन के पास ब्रह्मास्त्र भी था
यह अस्त्र सबसे अधिक खतरनाक था। यह हर प्रकार
के अस्त्रों के प्रभाव को काट सकता था। इसके संचालक स्वयं ब्रह्मा थे। इस अस्त्र
का काट किसी के भी पास नहीं था
के अस्त्रों के प्रभाव को काट सकता था। इसके संचालक स्वयं ब्रह्मा थे। इस अस्त्र
का काट किसी के भी पास नहीं था
7. और कृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने भगवान शिव से पसुपटसत्र भी
प्राप्त कर लिए थे।
प्राप्त कर लिए थे।
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